Bihar Flood ALERT: प्रयागराज से भागलपुर तक राइजिंग मोड में गंगा... नवगछिया और कहलगांव में उफनाई, बढ़ा बाढ़ का खतरा_我的网站
一 | राज्य ब्यूरो, देहरादून। प्रदेश में बरसात के बाद अब सड़कों में नए सिरे से ब्लैक स्पाट, अतिसंवेदनशील दुर्घटना संभावित स्थलों का निरीक्षण किया जाएगा। इन स्थलों के चिह्नीकरण के लिए परिवहन विभाग ने मानक तय किए हैं। इन्हीं के आधार पर सड़कों को संवेदनशील से लेकर अतिसंवेदनशील की श्रेणी में लिया जाएगा। इस संबंध में परिवहन मुख्यालय ने सभी जिलों को पत्र भेजकर इन मानकों के अनुसार बरसात बाद सर्वे करने को कहा है। प्रदेश में इस बार भारी वर्षा से मैदानी व पर्वतीय इलाकों में काफी नुकसान हुआ है। पर्वतीय मार्गों पर तो कई स्थानों पर सड़कें बह गई हैं। इस कारण मार्ग अभी भी बंद हैं। जिन स्थानों पर लगातार भूस्खलन हो रहा है, वे संवेदनशील दुर्घटना संभावित स्थलों के रूप में सामने आए हैं।,प्रदेश में मानसून से पहले तक 174 ब्लैक स्पाट, दुर्घटना के लिहाज से 600 से अधिक अतिसंवेदनशील क्षेत्र और 2500 से अधिक संवेदनशील चिह्नित किए गए हैं। इनको ठीक करने का सिलसिला लगातार जारी है। हलांकि, मानसून के चलते इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी होना तय माना जा रहा है।,अपर परिवहन आयुक्त एसके सिंह का कहना है कि सड़कों में संवेदनशील और अति संवेदनशील दुर्घटना संभावित स्थलों का नए मानकों के हिसाब से चिह्नीकरण किया जाना है। ये मानक सड़क सुरक्षा समिति की लीड एजेंसी द्वारा बनाए गए हैं। बरसात के बाद सभी जिलों को इन मानकों के अनुसार सड़कों में दुर्घटना संभावित स्थलों का चिह्नीकरण करने को कहा गया है।
क्या होता है ब्लैक स्पाट
ब्लैक स्पाट ऐसे स्थान को कहते हैं जहां एक वर्ष में 500 मीटर के दायरे में पांच से अधिक दुर्घटनाएं अथवा 10 से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हुई है।
क्या हैं संवेदनशील व अतिसंवेदनशील क्षेत्र के मानक
नए मानकों के अनुसार सड़क में दृष्यता, तीव्र मोड़, चौड़ाई, ढलान और बेरिकेडिंग की स्थिति के हिसाब से संवेदनशील व अतिसंवेदनशील क्षेत्रों का चिह्नीकरण किया जाएगा।。 संवाद सहयोगी, भागलपुर। Bihar Flood ALERT उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में हो रही लगातार बारिश का प्रभाव बिहार में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। प्रयागराज और वाराणसी में गंगा का जलस्तर अचानक रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी के बाद अब भागलपुर में भी राइजिंग मोड में है। गुरुवार को यहां गंगा में 20 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई।,जल संसाधन विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले पांच दिनों में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर सकता है। दो दिन पहले प्रयागराज में गंगा का जलस्तर ढाई मीटर और वाराणसी में करीब डेढ़ मीटर बढ़ा। इस अचानक हुई वृद्धि से राज्य सरकार की चिंता बढ़ गई है। सभी संबंधित जिलों के लिए अलर्ट जारी कर दिया गया है।,जल संसाधन विभाग ने बक्सर से भागलपुर तक तटबंधों की विशेष निगरानी करने का निर्देश दिया है। कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश ने बताया कि इलाहाबाद से फरक्का तक गंगा पूरी तरह राइजिंग मोड में है। अभियंता लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। कटिहार स्थित बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण मुख्य अभियंता कार्यालय ने बताया कि गोपालपुर प्रखंड के इस्माईलपुर-बिंदटोली तटबंध और सबौर प्रखंड के चांयचक क्षेत्र पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।,गंगा के दबाव को देखते हुए फरक्का बैराज के कुल 109 गेट में से 107 गेट खोल दिए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गंगा भागलपुर में खतरे के निशान से ऊपर भी जाती है, तो पानी अधिक समय तक नहीं ठहरेगा। तेज बहाव के कारण जलस्तर जल्द नीचे आ जाएगा।,28 अगस्त, सुबह 8 बजे की स्थिति के अनुसार, गंगा का अधिकतम उच्चतर स्तर 34.86 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 33.68 मीटर है। 27 अगस्त को जलस्तर 32.80 मीटर था, जो 28 अगस्त को बढ़कर 33.05 मीटर हो गया।,
गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। आने वाले कई दिनों तक जलस्तर बढ़ने की संभावना है। भागलपुर में फिर एक बार बाढ़ का संकट खड़ा हो सकता है।— आदित्य प्रकाश, कार्यपालक अभियंता, जल संसाधन विभाग, भागलपुर
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